सोमवार, 17 मई 2021

कोर्ट : एक धोका , जेल : आत्मसुधार केंद्र

19 March 2021
आज  मै सेंट्रल जेल नरसिंहपुर गई  और जेल सुपरिंटेंडेंट मैडम शैफाली तिवारी से मिली।जेल के मुख्य द्वार पर लिखा हुआ है घृणा पाप से करो पापी से नहीं।

नरसिंहपुर  का यह सेंट्रल जेल पहले बोरस्टलजेल के नाम से जाना जाता था । यह किशोर बंदी गृह मध्य प्रदेश का एकमात्र जेल था।  

यह जेल साल में एक बार गणेश स्थापना अवसर पर गजानन दर्शन हेतु  पब्लिक के दर्शनार्थ खोला जाता था। जहां हम अपने माता पिता और परिजनों के साथ गणेश जी के दर्शन हेतु जाते थे और कैदियों द्वारा बनाई गई हस्तशिल्प कला और अन्य रचनात्मक कार्यों को देखते और उनकी हौसला अफजाई करते थे।

यह जेल नरसिंहपुर स्टेशन के पास स्थित है। वर्तमान में यहां कैदियों की संख्या 1300 है जो कि एक बहुत ही चिंतनीय विषय है। अपराध और अपराधियों की बढ़ती संख्या को देखकर निश्चित रूप से बहुत ही दुख होता है।

अपराध की संख्या देखते हुए ऐसा लगता है  कहीं एक दिन ऐसा ना आ जाए कि अपराधियों की संख्या इतनी बढ़ जाए कि जेल भी छोटी पड़ जाए।

कारागार  सुधार  गृह भारतीय कानून व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण  अंग है । नरसिंहपुर सेंट्रल जेल की जेल अधीक्षक के  अथक प्रयासों के बाद यह जेल *आश्रम* जैसा स्थान  लगता है। सफेद कुर्ता- पैजामा और सफेद टोपी पहने हुए कैदी अपने- अपने कार्यों में मग्न दिखाई दिए। सभी दिल लगाकर एकता से एकाग्रता से कार्य कर रहे थे। जब व्यक्ति कोई काम नहीं करता है तभी उसके मन में अनेकों विचार आते हैं यह भी कहा गया है *खाली दिमाग शैतान का घर* ।कुछ ना कुछ करते ही रहना चाहिए । एक कैदी को उसकी सामर्थ्य के अनुसार कार्य देना ,निश्चित ही यह कुशल प्रशासनिक अधिकारी की ही पहचान है। 

जेल के गेट में प्रवेश होते ही *ययाति* की पेंटिंग  है जोकि है बहुत ही प्रेरणादायक है। उसके बाद मैडम शैफाली तिवारी के द्वारा बनाई गई *महात्मा ‌बुद्ध* की पेंटिंग हृदय परिवर्तन  और *आत्मज्ञान तथा ध्यान पर* केंद्रित है।

वैसे तो  विस्तार से देखें तो हम सभी इस संसार में कैदी ही हैं  और  यदि आध्यात्मिक स्तर पर देखें तो हमारी आत्मा विभिन्न प्रकार के बंधनों से बंधी हुई इस शरीर रूपी पिंजड़े में कैद है।
जब हमें आत्मज्ञान प्राप्त होता है तब हम इस माया नगरी और मायापति को समझने में सक्षम हो जाते हैं।

यदि जनसाधारण को यह समझ में आ जाएगी *ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या* और हम सब उस  ईश्वर के अंश  है  आत्मा अर्थात जीव जो अविनाशी  है तो विषय विकारों की बहुत हद तक छुट्टी हो जाए।

कारागार  में रहकर ही बहुत से असाधारण कार्य हुए  महात्मा गांधी , नेहरू , विनोबा भावे ने लोक कल्याण हेतु  किताबें  लिखीं। लोकमान्य गंगाधर तिलक ने  गीता लिखी जो  कर्मयोग की दुनिया में सबसे अच्छी व्याख्या करती है।  


यह भजन वैसे तो दो आंखें बारह हांथ फिल्म से है,यह फिल्म प्रेरणा।  देती है कि  समाजसुधार में आध्यात्मिक बल का उत्कृष्ट योगदान होता है,  इसमें हमें आत्म सुधार देखने को मिलता है। 

लगान  फिल्म में भी सच्चाई का ही बल और पुरुषार्थ और माँ का बच्चे के साथ मनोबल के रुप में खड़ा होना, मूल तत्व के रुप में है। 

मेरा भी यही मानना है कि जब तक  व्यक्ति आत्मज्ञान  हेतु प्रयास नहीं होता तब तक व्यक्ति गलत राह में भटक सकता है। 

मैडम तिवारी के बारे में नरसिंहपुर वासियों की राय है कि उन्होंने कारागार को जन्नत बना दिया है अपराधी अब कारवास से बाहर जाना  नहीं चाहते हैं । वास्तव में , शेफाली तिवारी मैडम highly intellecutal multidimentional personality की स्वामिनी हैं।
कारावास के बारे में यह भी प्रसिद्ध है कि *मथुरा में श्री कृष्ण भगवान का जन्म भी कारावास में* ही हुआ था अतः कारावास कोई अभिशप्त जगह नहीं है।

मैडम शेफाली तिवारी के  प्रयासों का ही यह प्रतिफल है कि अपराधियों द्वारा विभिन्न प्रकार रचनात्मक कार्य *कुशलतापूर्ण* किये जा रहे हैं जैसे संगीत कार्यक्रम की प्रस्तुति के लिए सुंदर स्टेज का निर्माण ,  लकड़ी से कुर्सी टेबल बनाने का काम, बाग बगीचे की देखरेख , हॉर्टिकल्चर, चित्रकारी, शिल्प कला, शास्त्रीय संगीत  सुर-ताल राग का विधिवत प्रशिक्षण जैसे तबला हारमोनियम ढोलक में कैदियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करवाना और उनके लिए अपनी ओर से संगीत शिक्षक की व्यवस्था करना, उनसे सहृदय व्यवहार करना यह सिद्ध करता है कि  अपराधियों के लिए उनके मन में सुधार की भावना है।

Music Therapy या संगीत चिकित्सा किसी भी अन्य चिकित्सा पद्धति के समान मानसिक रोगों की चिकित्सा कर रोगी के स्वस्थ होने की दर को बढ़ा देती है और व्यक्ति पुनः एक नए जीवन का शुरुआत करता है पिछली जिंदगी को भूलकर आगे की नई जिंदगी को सही दिशा ले जा सकता है। 

कैदियों  को काउंसलिंग देने का कार्य सिर्फ वही कर सकता है जो परमात्मा का अनन्य भक्त हो जिस पर परमात्मा की अनन्य कृपा हो जो अपनी संगति से गलत रास्ते पर चलने वाले व्यक्तियों को सही रास्ते पर ना सके।कोई भी टीचर या कोई भी काउंसलर सिर्फ प्रेरणा दे सकता है गृहण करना तो सामने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है।मेरी पीएचडी का विषय  ट्रांसफॉरमेशन ऑफ माइंड है और यह विषय साइकोलॉजि का है ।

तुलसीदासजी कहते हैं- “सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई” अर्थात दुष्ट प्राणी भी अच्छी संगति पाकर सुधर जाते हैं जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सुंदर चमकीला हो जाता है.
 
कई बार यह भी देखा गया है  कोर्ट के गलत निर्णय की वजह से निर्दोष व्यक्ति सजा पाता है । ऐसे  तथाकथित न्यायाधीशों को तो ईश्वर  या  प्राकृतिक  न्याय व्यवस्था ही दंडित करती है। 

अभी हाल ही में पता चला है कि  उत्तर प्रदेश का एक व्यक्ति  वकील और सबूत के अभाव में  कोर्ट केस हर जाता है और बीस वर्षों तक सजा पाता है और  एक दिन जब दूसरी कोर्ट  का यह निर्णय आता है कि यह  निर्दोष है इसे सजा मुक्त किया जाता है जब वह अपने घर लौटता है तो उसके माता पिता  दुनिया में नहीं होते हैं उसका परिवार इस दुनिया में नहीं  होता है । अतः वह फिर से कारागार में अपने जीवन जीने की व्यवस्था ढूंढता है। ना तो  उन्हे हाई कोर्ट ना ही सुप्रीम कोर्ट ही   बेचारे अशिक्षित कैदियों को कैद से छूटने के बाद उनके परिवार उन्हें स्वीकार नहीं कर पाते हैं उन का भरण पोषण नहीं कर पाते हैं अतः वे जानबूझकर कोई दूसरा अपराध करते हुए दिखाई देते हैं और कारागार में रहने की व्यवस्था ढूंढते हैं। 

वास्तव में जैसा मैंने अनुभव किया  कारावास में  साधारण निम्न वर्ग के अपराधी ज्यादा थे । आजकल विशेष श्रेणी के राजनैतिक और संपन्न अपराधी जैसे सलमान खान और संजय दत्त  के लिए कारागार सुरक्षित आराम गृह  और पुलिस व दूसरे गैंगो से बचने का सुरक्षित स्थान बन चुके हैं।

वास्तव में, जब  मानसिक अस्वस्थता ही व्यक्ति को गलत रास्ते पर ले जातीहै। Strong mind  वाला व्यक्ति अपनी क्षमता पर विश्वास रखता है अपने स्वविवेक से निर्णय लेते हुए अपना जीवन आनंद पूर्ण जीता है। इसी लोक कल्याण की भावना को हमें जन-जन तक पहुंचाना चाहिए और  जीवन जीने का वास्तविक लक्ष्य इंद्रिय सुख ना होकर  ईश्वर प्राप्ति होना चाहिए। 

यह संदेश हम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सके तो अपराध की बढ़ती संख्या को कम कर सकते हैं।


2 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बहुत अच्छी पोस्ट लिखी है. ऐसे ही आप अपनी कलम को चलाते रहे. Ankit Badigar की तरफ से धन्यवाद.

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  2. भारतीय जेलों की दशा बहुत अधिक भयावह और दयनीय है। और सबसे अफ़सोस की बात है कि ये किसी की भी प्राथमिकता में है ही नहीं।

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