बुधवार, 7 अप्रैल 2021

सूर्य नमस्कार , सर्वांगासन, हलासन, प्राणायाम , ध्यान




योगगुरु के रूप में जब मैं इंजीनियरिंग कॉलेज मुंबई के एनएसएस के वोलेंटियर्स को प्रशिक्षण दे रही थी तब बहुत सी  घटनाएं  हुई  जो बहुत ही मधुर और अविस्मरणीय है। जिन्हें एक बार में लिखना तो बहुत मुश्किल है धीरे-धीरे टुकड़ों में लिखती रहूंगी। इस दौरान हमने छोटे छोटे गांवों के चहुंमुखी विकास के लिए बहुत सारे कार्यक्रम किए। 

एक सीनियर अनुभवी प्रोफेसर और मेडिकल इंजीनियरिंग डेंटल छात्र-छात्राओं की रेक्टर होने के बावजूद भी मैंने कुछ इंटरेस्टेड टीचिंग स्टाफ और नॉन टीचिंग स्टाफ और स्टूडेंट्स को योग हेतु प्रोत्साहित किया और सर्वांगासन हलासन भुजंगासन गरुणासन पद्मासन प्राणायाम सिखाया।हॉस्टल की छात्राएं भी जब बहुत ही ज्यादा तनावग्रस्त होतीं तो मैं उन्हें योग और ध्यान करने की शिक्षा देती। चौबीस घंटे एक ही परिसर में रहने की वजह से छात्राओं को योग सिखाना प्रबंधन की नजर में ब्राउनी पॉइंट स्कोर करने जैसा था परंतु योग कक्षा कंडक्ट करने के लिए मुझे उचित स्थान नहीं मिल रहा था। कभी कॉन्फ्रेंस रूम, कभी लॉबी, कभी गार्डन में लंचटाइम में या उसके बाद मैंने कुछ मेडिकल छात्राओं की सप्ताह में एक बार योग कक्षा  कंडक्ट की और योग कक्षा की स्थापना के बारे में प्रबंधन से बात की।

एनएसएस या राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत राष्ट्र शक्ति का विकास युवाओं द्वारा किया जाता है।यह युवाओं की पर्सनैलिटी डेवलपमेंट  और स्किल डेवलपमेंट में बहुत सहायक होता है। बेज  में कोणार्क व्हील में आठ बार हैं जो दिन के 24 घंटे का प्रतिनिधित्व करते हैं  यानी 24 घंटों की अनवरत सेवा। बैज में लाल रंग इस बात को प्रतीक है  कि एनएसएस स्वयंसेवक रक्त से भरे हैं वे जीवंत, सक्रिय, ऊर्जावान और उच्च भावना वाले है। नौसेना का नीला रंग ब्रह्मांड का प्रतीक  है जिसमें एनएसएस एक छोटा सा हिस्सा है, जो मानव जाति के कल्याण के लिए अपने हिस्से का योगदान करने के लिए तैयार है।
योग और ध्यान के अलावा हमने (मुंबई यूनिवर्सिटी) स्वच्छता अभियान रेली निकलवाना,  गांवों के चौराहे पर स्वच्छता जागरूकता फैलाने हेतु वॉलिंटियर्स द्वारा नुक्कड़ नाटक करवा कर ग्राम वासियों को कचरा एक जगह इकट्ठा कर के डब्बे में डालने हेतु प्रोत्साहित करना।इस बात के लिए जागरूक करना कि कचरा या गंदगी में रहने से ही बहुत सारे रोग और बीमारियां फैलती हैं। शौचालय बनवाना, खानपान से संबंधित जागरूकता फैलाना, ब्लड डोनेशन, गांधी जयंती स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्रता दिवस पर गेटवे ऑफ इंडिया में भजन संध्या का कार्यक्रम करवाना, महाराष्ट्र गवर्मेंट की और से ट्री प्लांटेशन करवाना , आदि प्रमुख थे।

नुक्कड़  एक  नाट्य विधा है, जो  रंगमंच   से भिन्‍न है । इसके लिए मंच की आवश्यकता नहीं होती। इसमेंंंं कलाकार नाच गाकर , अभिनय करके किसी सड़क, गली, चौराहे या किसी संस्‍थान के गेट अथवा किसी भी सार्वजनिक स्‍थल पर भीड़ एकत्रित करके किसी समसामयिक समस्या को रखतेे हैं। हमारे प्रिय और मेधावी सक्रिय कार्यकर्ता प्रियंका वाटकर के नेतृत्व में  नुक्कड़ द्वारा गांव की समस्या और उसके समाधान को रखने में सफल रहे उन्होंने परिस्थितियों और समस्याओं को नुक्कड़ द्वारा अभिव्यक्त किया । 
प्रभारी अधिकारी के रूप में एनएसएस में कार्य कर मुझे जो अनुभव हुआ वह इन पंक्तियों को साकार करता है।
किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार... 
किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार....
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार...
जीना इसी का नाम है.... 

मुंबई से थोड़ी दूर पर गुलसुंदे  नामका एक गांव है जहां पर बहुत पुराना लगभग 800 साल से भी ज्यादा पुराना शिव मंदिर है 

जो कि सिद्ध मंदिर के रूप में जाना जाता है और वही शिव मंदिर के पास पातालगंगा नाम की नदी बहती रहती है। यह गांव और मंदिर बहुत ही सुंदर और शांत स्थल है।  गांव वालों के साथ मिलकर गांव की प्रगति के लिए कार्य करना शुरू किया। 
हमारे वॉलिंटियर्स और स्टाफ मेंबर्स सभी एकजुट होकर घुल मिलकर इतने अच्छे से कार्यरत थे कि लगता ही नहीं था कि केवल आठ दिन के लिए यहां पर है।


यह युवाओं की पर्सनैलिटी डेवलपमेंट  और स्किल डेवलपमेंट में बहुत सहायक होता है।
सात दिनों तक शिविर में स्टूडेंट्स ने सेवा कार्य करते हुए लोगों को श्रमदान के लिए जागरूक किया।
 ग्राम वासियों को शिक्षा व स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी। 

मेरे  योग प्रशिक्षण में, मुझे वॉलिंटियर्स  को बुनियादी सूर्य नमस्कार सिखाने के लिए कहा गया था, योग करवाने के लिए पूरी तरह से निर्देश की स्पष्टता, कक्षा के साथ संबंध बनाने की  क्षमता और वोलेंटियर्स के दिल से बोलने की हिम्मत देने की प्रेरणा एक अच्छे प्रशिक्षक का कर्तव्य था। 
प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय के योग ध्यान भजन के दैनिक अभ्यास से सभी कार्यकर्ताओं में अंतः-शांति, संवेदनशीलता, अंतर्ज्ञान और जागरूकता और बढ़ती और वे ज्यादा परफेक्शन से कार्य करते। 
कई वोलेंटियर्स  का काम में मन नहीं लगता नई उम्र के  वोलेंटियर्स थे , उन सभी का मन पेंडुलम की तरह डोलता कि इस कार्य को करने में मुझे लाभ है कि नहीं । स्वाभाविक रुप से -  भूत से भविष्य, अफसोस और गुस्से से चिंता, एवम भय और ख़ुशी से दुख के बीच में झूलते रहता I योग आसन  और  सुखद वातावरण उन्हें जीवन में सामंजस्य समता बनाए रखने में सक्षम बनाता। 

योग आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यक्ता है। यह केवल व्यायाम की प्राचीन पद्धति ही नहीं है बल्कि  कई शारीरिक मानसिक बीमारियों का समाधान भी है। योग गुरु के रूप में  वोलेंटियर्स से  सुबह मात्र कसरत करवाने से वोलेंटियर्स को दिनभर कार्य करने की ऊर्जा मिलती  थकान नहीं आती और  दिन भर कार्य करने के लिए शरीर का लचीलापन भी  बढ़ाता।
मेरी सुबह 5:00 बजे की योग कक्षा में सभी वॉलिंटियर्स बहुत ही अनुशासित और अपने कार्य के प्रति समर्पित रहते। 

वे योग का महत्व बहुत अच्छे से समझने लगे थे। योग आध्यात्म से ही संबंधित नहीं है यह एक पूर्ण विज्ञान हैI यह शरीर, मन, आत्मा और ब्रह्मांड को एकजुट करती हैI यह हर व्यक्ति को शांति और आनंद प्रदान करता हैI योग द्वारा वोलेंटियर्स  के व्यवहार, विचारों और रवैये में बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन आया।

एनएसएस गतिविधियों को विशेष रूप से खेल और युवा मामलों के मंत्रालय, सरकार द्वारा वित्त प्रदान किया जाता है।  सदस्यों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। इस योजना को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में विश्वविद्यालय से विभिन्न छात्रों को शामिल किया जाता है और उन्हें देश के आदर्श नागरिक बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।  एनएसएस स्वयंसेवकों को वर्दी और बैज पहनना अनिवार्य है। प्रकोष्ठभाग लेने वाले स्वयंसेवकों को कम से कम 240 घंटे नियमित गतिविधियों और दो साल की अवधि में एक विशेष शिविर पूरा करने पर प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। छात्रों के अकादमिक कैरियर में सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों में प्रमाणपत्र का महत्वपूर्ण मूल्य है।

राष्ट्रीय सेवा योजना का आदर्श वाक्य या दृष्टिकोण यह है: 'मुझे नहीं बल्कि आप'। यह लोकतांत्रिक जीवन के सार को दर्शाता है और निःस्वार्थ सेवा की आवश्यकता को बनाए रखता है और दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण की सराहना करता है । यह स्पष्ट करता है कि एक व्यक्ति का कल्याण अंततः समाज के कल्याण पर निर्भर है। इसलिए,  एनएसएस के अपने दिन-प्रति-दिन कार्यक्रम में इस आदर्श वाक्य का प्रदर्शन  किया जाता है। 

एन एस एस प्रकोष्ठ  विभिन्न कार्यक्रम जैसे रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम, स्वच्छ भारत अभियान (सफाई अभियान और क्षेत्र दौरान), ग्रीन वाक, रक्तदान शिविर, "राष्ट्रीय युवा उत्सव, स्वच्छता जागरूकता निर्माण  पर विशेष शिविर, टीसीएस रोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम, "छात्रों के समग्र व्यक्तित्व विकास" पर योग ध्यान कार्यशाला, विभिन्न भाषण, वाद- विवाद, निबंध प्रतियोगिताओं आदि पर कार्यशाला  आयोजित करता है।

योग मोटापा कम करने  में भी सहायक है ।  मोटापा कम करने  के नाम  पे कई जिमखाना और ट्रेनर  वर्कआउट के नाम पे शारीरिक अत्याचार करवाते है जिससे लाभ कि जगह हानि होती है। ट्रेनर कभी -कभी  ऐसे व्यायाम करवा देते हैं जो  शरीर के लिए हानिकारक सिद्ध होते है । शरीर को छरहरा रखना तभी संभव है जब हम कुछ जरुरी सावधानियां रखते हैं तब ही स्वास्थ्य एवं अन्य सुख प्राप्त कर पाते हैं।  

आजकल योग प्रशिक्षण कई संस्थाओं द्वारा किए जा रहे हैं। मुझे एक योग प्रशिक्षण शिविर याद है जो 2009, जनवरी जोगेश्वरी मुम्बई  में आर्ट ऑफ लिविंग  द्वारा योग गुरु श्री श्री रविशंकर जी के निर्देशन में करवाया गया।

आर्ट ऑफ लिविंग के बेसिक कोर्स को अब हैपीनेस प्रोग्राम कहा जाता है   जिसमेंं सुदर्शन क्रिया पर मुख्य ध्यान दिया गया।  मैंने यह अनुभव किया कि इस कोर्स में शारीरिक व्यायाम और ध्यान का पशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षिका प्रमिला दीदी थीं। मैं इस विषय की पहले से ही जानकर रही हूं।
 इस  कोर्स से मेरी उम्मीदें पूरी नहीं हो पाई। मुझे ज्यादा की भूख थी परंतु बहुत कम मिला।


मै  योग ध्यान वाले फैमिली  कलचर से हूं। हमारे छोटे फूफाजी  विगत 50-60 वर्षों से बिलासपुर के जाने माने योगाचार्य के रूप में प्रसिद्ध हैं।बचपन से ही सूर्य नमस्कार ,प्राणायाम , कपालभाति करते आ रही हूं और हमारा परिवार शक्तिपात दीक्षा प्राप्त है सहज समाधि क्या होती है इसका ही अभ्यास या साधना हम ध्यान में करते आए हैं। जब भी बुआजी फूफाजी नरसिंहपुर आते हम फूफाजी को सुबह चार बजे से आसन योग ध्यान करते हुए पाते। उनका यह शेड्यूल आज भी कायम है इसलिए वे बहुत तेजस्वी हैं और शारीरिक रूप से पूर्ण स्वस्थ्य हैं। शांत स्वच्छ स्थल पर हम उन्हें आसन करते हुए देखते । वे आसन के लिए   स्वच्छ और साफ हवादार जगह का चयन कर आसन (चटाई) बिछा कर पद्मासन यानी पाल्थी मार कर बैठ जाते और फिर गहरी सांस लेते हुए आसन करना शुरू करते। 

बचपन से मैंने अपने घर में घर में सूर्य नमस्कार से संबंधित बहुत सारी किताबें भी रखी देखीं थी और यही समझा था कि योगासनों में से सर्व श्रेष्ठ  सूर्य नमस्कार है । इसे करने से  शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक सभी प्रकार का लाभ प्राप्त होता है।इसे सर्वांग व्यायाम भी कहा जाता है। केवल इसका ही नियमित रूप से अभ्यास व्यक्ति को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से व्यक्ति का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। 'सूर्य नमस्कार' स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है। 

सूर्य-नमस्कार के नियमित अभ्यास से शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति की वृद्धि के साथ विचारशक्ति और स्मरणशक्ति भी तीव्र होती है। शरीर की चर्बी कम होती है और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है। 


इसके अलावा दमा, पुरानी खांसी या फेफड़ों संबंधी अन्य बीमारी में इस आसन को करने से आराम मिलता है। इससे बाजुओं में भी ताकत आती है।

सूर्य नमस्कार खाली पेट सुबह किया जाता है। सूर्य नमस्कार के प्रत्येक दौर में दो सेट होते हैं, और प्रत्येक सेट 12 योग आसान से बना होता है। 

सूर्य नमस्कार या सूर्य अभिवादन 12 शक्तिशाली योग आसन का एक अनुक्रम है। एक कसरत होने के अलावा, सूर्य नमस्कार को शरीर और दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए भी जाना जाता है
1प्रणामासन 2. हस्तोत्तानासन 
3. हस्तपादासन  4. अष्वसंचलनासन 5 दण्डासन 6.अष्टांग नमस्कार  7. भुजंगासन 
,8.अधोमुखस्वानासन 9. अश्व  संचलनसाना 
10.हस्तपादासन 11. हस्तोत्तानासन 12. ताड़ासन

सूर्य नमस्कार के तेरह मंत्र : 
  1. ॐ मित्राय नमः
  2. ॐ रवये नमः
  3. ॐ सूर्याय नमः
  4. ॐ भानवे नमः
  5. ॐ खगाय नमः
  6. ॐ पूष्णे नमः
  7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
  8. ॐ मरीचये नमः
  9. ॐ आदित्याय नमः
  10. ॐ सवित्रे नमः
  11. ॐ अर्काय नमः
  12. ॐ भास्कराय नमः
  13. ॐ श्री सबित्रू सुर्यनारायणाय नमः
सूर्य नमस्कार का अभ्यास बारह स्थितियों में किया जाता है, जो निम्नलिखित है

1.प्रणाम मुद्रा : दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हों। नेत्र बंद करें। ध्यान 'आज्ञा चक्र' पर केंद्रित करके 'सूर्य' का आह्वान 'ॐ मित्राय नमः' मंत्र के द्वारा करें।

2.हस्त उत्तानासन: श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। ध्यान को गर्दन के पीछे 'विशुद्धि चक्र' पर केन्द्रित करें।

3. पाद हस्तासन या पश्चिमोत्तनासन : तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें। माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे 'मणिपूरक चक्र' पर केन्द्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें।
अश्व संचालन आसन : इसी स्थिति में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। ध्यान को 'स्वाधिष्ठान' अथवा 'विशुद्धि चक्र' पर ले जाएँ। मुखाकृति सामान्य रखें।

5. पर्वतासन : श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं। ध्यान 'सहस्रार चक्र' पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें।

6.अष्टांग नमस्कार : श्वास भरते हुए शरीर को पृथ्वी के समानांतर, सीधा साष्टांग दण्डवत करें और पहले घुटने, छाती और माथा पृथ्वी पर लगा दें। नितम्बों को थोड़ा ऊपर उठा दें। श्वास छोड़ दें। ध्यान को 'अनाहत चक्र' पर टिका दें। श्वास की गति सामान्य करें।

7.भुजंगासन : इस आसन को करने के लिए जमीन पर पेट के बल लेट जाएं। चेहरा ठोड़ी पर टिकाएं कोहनियां कमर से चिपकाकर रखें और हथेलियों को ऊपर की ओर करके रखें। दोनों हाथों को कोहनी से मोड़ते हुए आगे लाएं और बाजुओं के नीचे रखें। 
 इस स्थिति में धीरे-धीरे श्वास को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधे कर दें। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं। घुटने पृथ्वी का स्पर्श करते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। मूलाधार को खींचकर वहीं ध्यान को टिका दें।
इस स्थिति में 30 सेकेंड तक रुकना है। शुरुआत में ऐसा न कर पाएं, तो उतनी देर करें जितनी देर आराम से कम पा रहे हैं। बाद में सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सिर को नीचे लाकर ठोड़ी को जमीन पर रखें और हाथों को पीछे ले जाकर ढीला छोड़ दें।

इसके दूसरे हिस्से में दोनों हथेलियों को सामने की ओर लाकर ठोड़ी के नीचे रखें। अब पहले की तरह सांस धीरे-धीरे लेते हुए सिर से शरीर को ऊपर की ओर उठाएं। कंधे से कमर तक का हिस्सा हथेलियों के बल पर ऊपर उठाएं। इस अवस्था में 30 सेकेंड तक रहना है और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में लौट आएं। इस आसन को करते समय शरीर को कमर से उतना ही पीछे ले जाएं जितना आसानी से हो सके। लचीलापन एकदम से नहीं आएगा, अनावश्यक दबाव डालने से पीठ, छाती, कंधे या हाथों की मांस-पेशियों में दर्द हो सकता है। पीठ या कमर में ज्यादा दर्द हो तो भी यह आसन नहीं करना चाहिए।

8.पर्वतासन: श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं। ध्यान 'सहस्रार चक्र' पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें।

9.अश्व संचालन आसन : इसी स्थिति में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। ध्यान को 'स्वाधिष्ठान' अथवा 'विशुद्धि चक्र' पर ले जाएँ। मुखाकृति सामान्य रखें। 

10.हस्तासन :तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें। माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे 'मणिपूरक चक्र' पर केन्द्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें।

11 हस्त उत्तानासन: श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। ध्यान को गर्दन के पीछे 'विशुद्धि चक्र' पर केन्द्रित करें।

12प्रणाम मुद्रा : यह स्थिति पहली मु्द्रा की तरह है अर्थात नमस्कार की मुद्रा। बारह मुद्राओं के बाद पुन: विश्राम की स्थिति में खड़े हो जाएं। अब इसी आसन को पुन: करें। 

सूर्य नमस्कार शुरुआत में 4-5 बार करना चाहिए और धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 12-15 तक ले जाएं।
 यह स्थिति - पहली स्थिति की भाँति रहता है। सूर्य नमस्कार प्रार्थना करते समय  सूर्य मंत्र का  उच्चारण  भी करना चाहिए ।


5 टिप्‍पणियां:

  1. अत्यंत सटीक जानकारी प्रदान की है देवी योग साधकों के साथ ही साथ साधरण जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी है उचित तरीके से सब कुछ समझाने के लिए आपका आभार ।

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  2. भावना आप कमाल हैं। You are an extraordinary person and great human being. Best Regards. Sanjay

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  3. भावना, आपका मार्गदर्शन और मानवता के प्रति योगदान सराहनीय है। संजय शर्मा।

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  4. Very good post,came to know very deep and knowledgeable things about yog

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